Harshad Mehta Scam कैसे किया ?

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HARSHAD MEHTA SCAM 1992
HARSHAD MEHTA SCAM 1992
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Harshad Mehta Scam की कहानी 

Harshad Mehta Scam के समय पर बांड और शेयर की ट्रेडिंग ऑनलाइन नहीं होती थी | उस समय तक सिर्फ फिजिकल मोड में ही ट्रेडिंग की जा सकती थी | करोड़ों रुपए के शेयर बांड के सर्टिफिकेट Harshad Mehta जैसे शेयर दलालों के कार्यालय में पड़े रहते थे | व उनकी डिलीवरी किये बिना ही 95% से अधिक सौदे सिर्फ भरोसे पर होते थे | और जब ऑनलाइन ट्रेडिंग होती नहीं थी तो उन्हें आसानी से चेक भी नहीं किया जा सकता था ।

HARSHAD MEHTA SCAM 1992
HARSHAD MEHTA SCAM 1992

Harshad Mehta Scam ने उठाया लूपहोल का फायदा 

इसी कमी का Harshad Mehta जैसे दलालों ने फायदा उठाया और उन्हें शेयरों को जिसे सिर्फ एक बार बेचने का नियम निर्धारित था | उसे बार-बार बेचा जो भी सरकारी बैंक थे उन सभी को उसने शेयर दिखाकर लोन निकाला फिर उसी पैसे से बाजार में फिर शेयर ख़रीदा | जब इन्हीं शेयर की बैंकों ने फिजिकल डिलीवरी मांगी तो बैंकों के होश उड़ गए । क्योंकि इन्हीं शेयरों को उसने एक नहीं उसने कईयों को बेच दिया था । हर शेयर के कई मालिक निकले |

Harshad Mehta Scam को उदाहरण के तौर पर समझते हैं

जैसे कि मान लीजिए कोई जमीन है उस जमीन को किसी एक आदमी को दिखा कर उससे पैसे ले लिए गए फिर जो पैसे मिले उससे फिर नई जमीन ले ली गई फिर इन दोनों जमीनों को दिखाकर फिर बैंक से लोन निकाला गया | फिर से जमीन खरीदी गई फिर तीसरे आदमी को बेची गई इस प्रकार एक ही जमीन के कई मालिक निकल गए ।
इसमें सबसे ज्यादा नुकसान सरकारी बैंक और UTI को हुआ जिससे इन्होने जो भी शेयर खरीदा था उसकी इनको फिजिकल डिलीवरी कभी मिली ही नहीं इनके बेचे हुए सारे शेयर के पैसे शेयर मार्केट में डूब गए |

इस घोटाले का सबसे पहले पर्दाफाश टाइम्स ऑफ इंडिया की जानी-मानी पत्रकार Sucheta Dalal ने की थी | जब इस पर Sucheta Dalal ने गहन जांच-पड़ताल की तब उनके पैरों तले जमीन खिसक गई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुका था | और Harshad Mehta करीबन 5000 करोड रुपए शेयर मार्केट के डकार चुका था | यह घोटाला Harshad Mehta Scam 1992 घोटाले के नाम से जाना जाता है |

Harshad Mehta Scam के कुछ फायदे भी हुए

इस घोटाले का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जो सरकारी संस्थाएं डिजिटल नहीं होना चाह रही थी | मजबूरी में उन्हें अब डिजिटल होना पड़ रहा था जैसे UTI और LIC हर बार कोई न कोई घोटाला होता रहता था | जिससे मजबूर होकर 5 साल के भीतर ही इन्होंने BSE यानी BOMBAY STOCK EXCHANGE के दलालों से पीछा छुड़ाकर अपना NSE नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में स्थापना करवाई | और वहां पर अपने सारे शेयर ट्रांसफर की और उसके बाद शेयर मार्केट में फिजिकली शेयर और बांड की खरीद-फरोख्त प्रणाली का अंत हुआ और इसके बाद डीमेट ट्रेडिंग चलन में आया ।

इससे पहले भी कई सरकारें BOMBAY STOCK EXCHANGE से दलालों से पीछा छुड़ाने के लिए और सारे कागजों का डिजिटलीकरण करने के लिए अनुरोध कर चुकी थी  | और कह कह कर थक चुकी थी लेकिन शेयर मार्केट के दलालों के चंगुल इतना मजबूत था की मजबूरी बस कुछ कर ही नहीं पा रहे थे|  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज बनने के बाद और इस घोटाले को सामने आने के बाद BOMBAY STOCK EXCHANGE को भी मजबूरी में डिजिटलीकरण की तरफ जाना पड़ा | लेकिन कहते हैं कि दूध का जला छाछ भी फूंक फूंक कर पीता है | अपने बदनाम घोटालों के कारण BOMBAY STOCK EXCHANGE आज भी बदनाम है | यही कारण है कि आज भी विदेशी और रिटेल निवेशक BOMBAY STOCK EXCHANGE में पैसा लगाने से पहले 100 बार सोचते हैं |

इसके बाद बिना सिक्योरिटी डिपॉजिट मार्जिन राशि जमा किए बिना सभी तरह के शेयरों पर रोक लग गई और इन घोटालों को रोकने के लिए और शेयर मार्केट के दलालों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी (SEBI) की भी स्थापना की |

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